Monday, June 10, 2024

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद 'प्रिय' की रचना- नन्ही परी

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- परी
शीर्षक- नन्ही परी 
विधा- छंद मुक्त कविता 
संपर्क- 7974389033

पिता के चेहरे पर मुस्कान छा गई।
माँ के दुखों की साथी आ गई।।

मासूम सलोनी प्यारी सी कली,
बातें हैं उसकी मिश्री सी डली।।

कमसिन है,कोमल है,नाजुक है।
फूलों की खुशबूओं सी इनायत है।।

कभी लगता है कुदरत ने बुलबुल उतारी है।
मेरी नन्ही परी तू मुझे प्राणों से प्यारी है।।

मासूम सी कली मेरी प्यारी बिटियाँ।
भाई को राखी बांधने आ गई।।

पैरों में घुंघरू बांधकर छमक-छमक तू बजाती‌‌।
कभी दादा,कभी दादी,कभी माँ के पास भागती।।

बरसात के पानी में उछल-उछल कर नाचती।
जैसे वन में मोर सुंदर छवि को साजती।।

         ✍🏻 परमानंद निषाद'प्रिय'
         ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
      कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- परी
शीर्षक- नन्ही परी 
विधा- छंद मुक्त कविता 
संपर्क- 7974389033

पिता के चेहरे पर मुस्कान छा गई।
माँ के दुखों की साथी आ गई।।

मासूम सलोनी प्यारी सी कली,
बातें हैं उसकी मिश्री सी डली।।

कमसिन है,कोमल है,नाजुक है।
फूलों की खुशबूओं सी इनायत है।।

कभी लगता है कुदरत ने बुलबुल उतारी है।
मेरी नन्ही परी तू मुझे प्राणों से प्यारी है।।

मासूम सी कली मेरी प्यारी बिटियाँ।
भाई को राखी बांधने आ गई।।

पैरों में घुंघरू बांधकर छमक-छमक तू बजाती‌‌।
कभी दादा,कभी दादी,कभी माँ के पास भागती।।

बरसात के पानी में उछल-उछल कर नाचती।
जैसे वन में मोर सुंदर छवि को साजती।।

         ✍🏻 परमानंद निषाद'प्रिय'
         ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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