जिला - महासमुंद
राज्य -छत्तीसगढ़
विषय-"योग"
विधा- चौपाई छंद
शीर्षक -"योग गाथा"
संपर्क -9179134271
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रहे निरोगी देह हमारी, जिसमें रहती आत्मा प्यारी।
योग ध्यान हम सब अपनाएँ, तन मन निर्मल काया पाएँ।।
प्रातः काल को ही उठ जाएँ, नित्यकर्म पूरा कर आएँ।
ऋषि करते थे योग तपस्या, बीमारी थी नही समस्या।।
ऋषियों ने यह योग सिखाया, योग दवा है दिया दिखाया।
लाख दुखों की एक दवाई, बात है सच्ची नहीं हवाई।।
योग किया तभी शक्ति पाई, सबकी इसमें दिखी भलाई।
सुन्दर तन मन बने हमारा, अपनाया इसको जग सारा।।
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