Wednesday, April 24, 2024

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- प्रभु दर्शन

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
जिला-दुर्ग
राज्य-छ ग
विधा- दोहा छंद
संपर्क 9131777203

रहती मेरी चाल तय ,चलता हूँ अविराम।
मंदिर वाली राह चुन  , जाता मैं प्रभुधाम ।।
रोकें चाहे घोर तम,  चलना मेरा काम ।
काँटे चुभते राह तब,  रटता कान्हा नाम ।।


करें मिलन की चाह जो , पाते दर्शन  आप ।
पहुंँचे प्यारे द्वार तब , मिटते सारे पाप ।।
 होये संध्या नित्य ही,  करना दीपक दान ।
आते ईश्वर पास यदि, देते साधक मान ।।

अनुरमा शुक्ला
दुर्ग छ.ग.

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