जिला-दुर्ग
राज्य-छ ग
विधा- दोहा छंद
संपर्क 9131777203
रहती मेरी चाल तय ,चलता हूँ अविराम।
मंदिर वाली राह चुन , जाता मैं प्रभुधाम ।।
रोकें चाहे घोर तम, चलना मेरा काम ।
काँटे चुभते राह तब, रटता कान्हा नाम ।।
करें मिलन की चाह जो , पाते दर्शन आप ।
पहुंँचे प्यारे द्वार तब , मिटते सारे पाप ।।
होये संध्या नित्य ही, करना दीपक दान ।
आते ईश्वर पास यदि, देते साधक मान ।।
अनुरमा शुक्ला
दुर्ग छ.ग.
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