कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- गणराज
शीर्षक- घर में पधारो गजानंद
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033
आय हँव तोर दुवारी म,किरपा करौ गनराज।
हे लंबोदर दुःख हरईया,मंगल करयव आज।।
देवता म पहिली पूजईया, गौरी लला गनराज।
गनपति सुनले बिनय ल, रखबे मोर लाज।।
गौरी लला गनेश जी, बल,बुद्धि के भंडार।
शिव-साक्षी के लला हो, करथव सब ल दुलार।।
सबके घर म आज ले, पधारो प्रभु आज।
मुसुवा के सवारी करके, अंगना आबे आज।।
एक दंत गनराज ह, करँय लड्डू भोग।
गौरी लला गनराज ले, मिलथे सुख के भोग।।
परमानंद बिनती करँय, तुँहर प्रभु गनेश।
दुखियारी के तँय दाता अस, विघ्न हर्ता गनेश।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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