नाम- हिम्मतसिंह अरमो "अरमान " ।
जिला- रायपुर ।
राज्य-छत्तीसगढ़ ।
विषय- बारूद ।
शीर्षक- तबाही का सामान ।
विधा- छंद-मुक्त कविता ।
मोबाइल-6264189643 ।
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"" तबाही का सामान ""
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पारिवारिक रिश्तों की ताकत--
अपनेपन का अहसास कराती है।
तबाही का सामान जब बन जाती है--
रिश्तों में आपसी खटास हो जाती है ।
बारूद सी आग दिलों में सुलगती--
विचारों में ज्वालामुखी है जब फूटती ।
आज सारा विश्व सुरक्षा की होड़ में--
बारूद का असला इकट्ठा करते हैं ।
मैं की आग ने इंसानियत को मारी है--
नीचा दिखाने बारूद सी बातें करते हैं।
जीवन में भूख मिटाने भोजन चाहिये--
आग जलाने बारूद की तीली चाहिए।
बारूद दहशत का माहौल बना देता--
देशद्रोही के लिए रक्षा कवच है होता।
बारूद से बनते हैं फुलझड़ी व फटाके-
हर जलसे की शान को हैं कैसे बढ़ाते।
बारूद का होगा जब विनाशी प्रयोग--
युद्ध का दिखेगा चहुँओर खूब प्रकोप।
बारूद का सुरक्षित व सीमित उपयोग-
सबको सुकून का अहसास करायेगा।
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