Friday, August 18, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद 'प्रिय' की रचना- निर्मल जल की धार

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- नदी
शीर्षक- निर्मल जल की धार
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033

भारतवासियों का गंगा नदी अभिमान है।
निर्मल पावन धरा से हिंद देश महान है।।

गंगा नदी के जल से पावन करूँ घर द्वार।
बहते जल की धार से जीवन का हो उद्धार।।

घर-घर में रखते लोग गंगा जल को शान।
गंगा,जमुना, सरस्वती बढ़ा रहा है मान।।

शिव मुकुट से मिला है गंगा को मान।
बहती निर्मल धार से मिलता है सम्मान।।

छ.ग. में बहती है सरयू, जोंक,महानदी।
'प्रिय' सदा सराबोर है देखकर सुंदर वादी।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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