नाम- हिम्मत सिंह अरमो "अरमान "।
जिला-रायपुर ।
राज्य-छत्तीसगढ़ ।
विषय- शर्मसार ।
शीर्षक-शर्मसार ।
विधा- छंद-मुक्त काव्य ।
मोबाइल-94252-02803 ।
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।। शर्मसार ।।
क्यों शर्मसार हो रही है--
हमारी मानवता ।
मरघट सी पसरी है--
जिंदगी हमारी ।
दर्द-ए-गमों का सैलाब--
बन पड़ी है जिंदगी ।
जुबाँ सिल चुकी है--
मैं के सागर से ।
पर शर्मसार नहीं है जिंदगी--
कब्रिस्तान बनी है, आज बस्ती ।
अपने जिंदा होने का एहसास--
करायेंगे, कर्म की लकीरों से ।
याचक बन कब तक माँगोगे--
दानवीर कर्ण कब बनोंगे ।
ए "अरमान " खुद की नज़रों में--
मत गिरना वरना होगे शर्मसार ।
बेशर्मी का कवच तुम उतार दो--
मेहनतकश इंसान तुम बन जाओ ।
शर्मों-हया, लज्जा नारी का गहना--
ओढ़कर जिंदगी को सँवारे रखना ।
देश की अखंडता को बचाने के लिए--
संवाद की शालीनता बनाये रखना ।
हम संकल्प करें की देश को --
कभी भी शर्मसार ना होने देंगे ।
विश्व पटल पर डंका बजायेंगे--
अपने विवेकपूर्णता का भान करायेंगे।
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