Thursday, April 13, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- अन्न को तरसता अन्नदाता

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- अन्नदाता 
शीर्षक- अन्न को तरसता अन्नदाता
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033

किसान इस संसार के; मिटाते भूख प्यास।
मानव घर बैठे हुए; रोकना नहीं स्वास।।1।।

जग के अन्नदाता है; मेहनत करे किसान।
अन्न उगाकर देश को; देते चावल धान।।2।। 

करते परिश्रम खेत में; हल चलाते रोज।
बाँधे पगड़ी शीश में; किसान करते भोज।।3।

बरखा करे विश्राम तो; किसान हो बेहाल।
बरखा के बौछार से; किसान होय निहाल।।4।।

अन्न को तरसते सभी; उगे नहीं जब धान।
खेतों के श्रृंगार से; बढ़ता किसान मान।।5।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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