कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- अन्नदाता
शीर्षक- अन्न को तरसता अन्नदाता
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033
किसान इस संसार के; मिटाते भूख प्यास।
मानव घर बैठे हुए; रोकना नहीं स्वास।।1।।
जग के अन्नदाता है; मेहनत करे किसान।
अन्न उगाकर देश को; देते चावल धान।।2।।
करते परिश्रम खेत में; हल चलाते रोज।
बाँधे पगड़ी शीश में; किसान करते भोज।।3।
बरखा करे विश्राम तो; किसान हो बेहाल।
बरखा के बौछार से; किसान होय निहाल।।4।।
अन्न को तरसते सभी; उगे नहीं जब धान।
खेतों के श्रृंगार से; बढ़ता किसान मान।।5।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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