Tuesday, April 11, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- निर्मल जल की धार

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- निर्मल 
शीर्षक- निर्मल जल की धार
विधा- दोहा छंद 
संपर्क- 7974389033

निर्मल बहती नीर से; मन में बढ़ता शोर।
तेज हवा प्रवाह से; नीर फैलता भोर।।1।।

प्रभुवर विनती आपसे; सुखमय करो संसार।
शीतल बहता नीर है; मन से करना प्यार।।2।।

नीर बिना सांसें रुकीं; तन को मिलता पीर।
संकट आये नीर का; मन में रखना धीर।।3।।

मानव जल की रोक से; जल संकट नहीं आय।
निर्मल जल की धार से; सुखमय जीवन पाय।।4।।

शीतल जल अनमोल है; मानव रखना ध्यान।
माँ गंगा सबको दिया; सदा श्रेष्ठ वरदान।।5।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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