नाम: हिम्मत सिंह अरमो ।
जिला: रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: यथार्थ ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
***************************
::::।। यथार्थ ।।::::
""""""""""""""""
मानव जीवन क्या है जान ले---
जड़-चेतन की गूढ़ता मर्म को जान ले।
प्रकृति के यथार्थ को समझ ले ---
तो मानव मानवता का बीज बोने लगे।
सत्यता का परिचय जब होता है--
यथार्थ की कसौटी पर खरा होता है ।
जीवन की डोर अनमोल होती है--
जब यथार्थ की मधुरता घुलती है ।
आज यथार्थ की धरातल से हट रहे--
अभिमान को लोग हवा दे रहे ।
यथार्थवादी दार्शनिकों के चिंतन ने--
संसार को अनूठी मिसाल हैं दिये ।
यथार्थवादी जीवन त्याग-तप का हाला
जो चले इस राह पहने यश की माला ।
यथार्थवादी जीवन है कष्टों का मेला--
वही कर्मयोगी जीवन में रहे अकेला।
:::::::::।।। इ ति ।।।::::
No comments:
Post a Comment