रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पता - पेंडरवानी , कंवर ,
जिला - बालोद , छत्तीसगढ़
विषय - होली
शीर्षक - होली है
संपर्क - 9098518976
होली है
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फागुन में मस्त अमरैय्या की ,
सजकर आई डोली है ,
लाल -गुलाबी , अबीर - गुलाल ,
उड़ाते आई होली है ,
पलास अंगारे दहकाते हैं ,
गम में डूबी विरहनी की बोली है,
गली- गली में रंग बरसाते बच्चे ,
फ़ाग गाते आई होली है ,
झूमें मादकता में धरती ,
महुआ की रस जो घोली है ,
इठलाते कोयल जब कूके ,
विरह बढ़ाते बोली है,
रंग और भंग का अदभुत संगम ,
झूमते मस्तों की टोली है,
अठखेलियां करते कहते कान्हा ,
राधा इतनी क्यों भोली है ?
लाज -शरम सब छोड़ के ललना ,
अधरों की गिरहें खोली है ,
ज्यों पराग संग लिपट भ्रमर ,
यों रहें सजना,देखो आई होली है ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
पेंडरवानी , कंवर ,बालोद , छ. ग.
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