Thursday, March 2, 2023

बालोद से शैलेन्द्र चेलक की रचना- होली है

रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पता - पेंडरवानी , कंवर , 
जिला - बालोद , छत्तीसगढ़
विषय - होली
शीर्षक - होली है 
संपर्क - 9098518976

                होली है
----------------------------------------
फागुन में मस्त अमरैय्या की ,
              सजकर आई डोली है ,
लाल -गुलाबी , अबीर - गुलाल ,
                 उड़ाते आई होली है ,
पलास अंगारे दहकाते हैं ,
        गम में डूबी विरहनी की बोली है,
गली- गली में रंग बरसाते बच्चे ,
                 फ़ाग गाते आई होली है ,
झूमें मादकता में धरती ,
           महुआ की रस जो घोली है ,
इठलाते कोयल जब कूके ,
               विरह बढ़ाते बोली है, 
रंग और भंग का अदभुत संगम ,
               झूमते मस्तों की टोली है,
अठखेलियां करते कहते कान्हा ,
                    राधा इतनी क्यों भोली है ?
लाज -शरम सब छोड़ के ललना ,
             अधरों की गिरहें खोली है ,
ज्यों पराग संग लिपट भ्रमर ,
       यों रहें सजना,देखो आई होली है ,

       - -   शैलेन्द्र चेलक - -
पेंडरवानी , कंवर ,बालोद , छ. ग.

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...