कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- नीर
शीर्षक- जल ही जीवन है
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033
जल बचाओ बूँद-बूँद ; संंकट है गंभीर।
संकट बढ़ता जगत में; धरती सोखे नीर।।1।।
अमूल्य जीवन नीर से; मानव का आधार।
बरखा जल के रोक से; होय मानव उद्धार।।2।।
चालू करके बोर को; करते नीर बर्बाद।
मानव रोके नीर को; जीवन कर आबाद।।3।।
भूजल स्तर कम हो रहा; संकट है गंभीर।
जल बचाओ हे मानव; करके जीवन धीर।।4।।
जल की बूँद सहेज लो; वर्षा जल के धार।
मानव रोको नीर को; बहा नहीं बेकार।।5।।
जंगल हरियाली करें; पत्ते पाये नीर।
मन में सदा धैर्य से; जीवन चले धीर।।6।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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