नाम:- हिम्मतसिंह अरमो ।
जिला- रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: होली ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
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%%%।।* होली *।।%%%%
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शीत ऋतु का चुपके से निकल जाना--
और ग्रीष्म ऋतु का हौले हौले आना ।
बंसत की बासुंती खुशबू का ढल जाना
महुआ के गदराये फूलों का महकना ।
गोप-गोपियों का बरसाने की होली में-
लठियों से पीटना रंगों का बरसाना ।
पौराणिक कथाओं में होली का रंग--
बिखरे इतिहास भी ऐसे ही बहुरंग ।
प्रकृति बिखेरे पलास के दहकते रंग--
कोयलिया सुनाये अपना मधुरिमा रंग ।
पिया मिलन की आस लिए----
परदेश गए पिया का भरे इंतजारी रंग ।
अबकी होली में मँहगाई से सराबोर--
जनता का बजट बिगड़ा हुआ शोर ।
बुरा ना मानो होली है नेता कहते--
विकास के लिए सब सहने हैं पड़ते ।
वैमनस्यता मिटाएँ बिखरें प्रेम का रंग--
रंग में भंग ना हो,दिखे देशप्रेम का रंग।
आधुनिकता के रंग में बदल गया रंग--
पाश्चात्य संस्कृति का चढ़ा है ऐसा रंग ।
अपनी संस्कृति अपना रंग है भाईचारा
मानवता मिठास रंग हो बहुत सारा ।
"""""""इति """""""
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