नाम: हिम्मत सिंह अरमो ।
जिला: रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: पलाश ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
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====।। पलाश ।।====
पतझड़ में भी वनों की बहार हूँ--
अंगारों से दहकते फूलों की लड़ी हूँ ।
मुझमें पलते लाख कीट --
लाख उत्पादन का भंडार हूँ ।
मुहावरा ढाक के तीन पात--
मेरी बनी अनूठी मिसाल है ।
औषधीय गुणों की खान हूँ---
छाल का काढ़ा और जड़ दवा हूँ ।
पत्ते से बनते दोनै व पत्तलें ---
पूजा, नाश्ता व भोजन की थाली हूँ ।
मैं बसंत की बहार हूँ--
अधजले कोयले की लगती कतार हूँ ।
होली के रंगोंत्सव की शान हूँ---
गुलाल बन चेहरे की मुस्कान हूँ ।
चूड़ी शिल्पकार के हाथों--
लाख से बनी वस्तु नारी का मान हूँ ।
आखिर मैं आपका पलाश हूँ--
बसंतोत्सव होली की पहचान हूँ ।
मुझसा खिलना औरों को लुभाते--
इन्हीं गुणों से हम उपयोगी हो जाते ।
====इ ति ====
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