Saturday, February 18, 2023

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- बेटियाँ

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
  जिला -   कांकेर,राज्य-छ.ग.

          विषय-बेटियाँ
          दिनाँक-18.02.23

 वहशी, दरिंदों,लुटेरों से,
 भरी है ये दुनियाँ।

नासमझ,मासूम देख,
 डोलती नियत इनकी गुड़िया।।

देख बुरी नजर  बहुत घबरा,
 जाती है नन्ही सी बेटियाँ।

 तेरे भी घर में क्या माँ, बहन,
 बेटी नहीं ?पूछती है बेटियाँ।।

 क्या वहाँ भी तेरी नजरें खोटी  
  होती है,सवाल उठाती बेटियाँ?

 देख तेरे संसार की हालत,
 रोती है सारी बेटियाँ।।

कभी भ्रूण हत्या,दहेज कभी  
 दरिंदों की भेंट चढ़ती है बेटियाँ।

 देख खतरों को अब नन्ही कली,  
 आँगन में कैसे खेले  बेटियाँ।।

 आँखों का तारा,घर का उजाला
   बाहर क्यों चुभती है बेटियाँ। 

जालिम दरिंदों संभल जा   
 धिक्कारती है तुम्हें बेटियाँ।।

 वंशहीन और पुरुषार्थ-
  हीन कर जाएंगी बेटियाँ।

असुरों का संहार करने  
 दुर्गा,कालिका बन जाएंगी बेटियां।।

              नलिनी बाजपेयी
       संबलपुर, कांकेर, (छ.ग .)

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