Monday, February 27, 2023

बिलासपुर से सावित्री यादव 'सावि' की कृत आलेख- वंदे मातरम्

आज दिनांक  -26-2-2023
दिन _सोमवार
विषय -वन्देमातरम 
रचनाकार  - सावित्री यादव "सावि "
                 बिलासपुर  छ. ग.
                 मो. नं. _ 7566685373
    लेख सृजन _सैनिक और उनके परिवार के परिदृश्य  मे,
    
             शीर्षक _ सैनिक और उसके परिवार का बलिदान 
                  
जय हिन्द 
(जय जवान, जय किसान )

ज़ब बच्चा  जन्म लेता है| तो माँ की ख़ुशी की कोई सीमा 
नहीं रहती है | वह सपने देखने लगती है की बढ़ा हो वो 
उसका  ध्यान रखेगा|
ज़ब बढ़ा होकर वही लाल  ज़ब सेना मे जा  मातृ भूमि  की 
सेवा करने की बात कहता है |तो माँ का हृदय  गर्व से  भर उठता है |
ख़ुशी ख़ुशी देश की सेवा हेतु अपने पुत्र को भेज देती है |
उस माँ की का दिल कितना सहता .होगा |जो इतना बढ़ा निर्णय  लेती है |की अब उसके  पुत्र को कभी भी कुछ भी हो सकता है  |
फिर भी धैर्य रख वो देश के  प्रति अपना कर्तव्य  को पूरा करते है |
फिर कुछ दिन बाद पुत्र का विवाह करते है| जानते है| ये सुख क्षणिक  या  फिर दीर्घ  हो सकता है |

माता पिता के बाद उस लड़की का त्याग जो सब जानते हुये  उस वीर सैनिक  के नाम  का सिंदूर लगाती है |माथे पर 

इसी तरह दिन बीत रहे होते है |छुट्टी  मे घर -परिवार  और ड्यूटी मे मातृ भूमि के प्रति कर्तव्य  |
अचानक ऐसा होता है| कि सीमा मे जाकर उस सैनिक को अपने देश की रक्षा  हेतु अपने प्राणो की आहुति देनी पड़ती है | उस समय उस परिवार की दशा  क्या  होती होंगी | जिसका एक मात्र पुत्र भी देश की खातिर बलिदान हो गया हो|

उस पिता के सब्र को तो देखिये बुढ़ापे मे जवान बेटे को कंधा देते है| उस माँ का दर्द जिस  बहु को शानो सौगत से लाते है |उनको  ही विधवा  होते देखना बच्चों को देखो जो पिता  के  साये से महरूम हो जाते है |

सबसे बड़े  योद्धा  तो उस परिवार का हर सदस्य होते है| जो अपने घर के  वीर सैनिक के बलिदान के  साथ साथ  अपने सपने अरमान दुनिया सब कुछ मातृभूमि की सेवा मे लगे उस वीर के साथ बलिदान कर देते है |

किसी भी सैनिक के बलिदान होने के बाद उसके घर की पारिवारिक दश

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