आज दिनांक -26-2-2023
दिन _सोमवार
विषय -वन्देमातरम
रचनाकार - सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
मो. नं. _ 7566685373
लेख सृजन _सैनिक और उनके परिवार के परिदृश्य मे,
शीर्षक _ सैनिक और उसके परिवार का बलिदान
जय हिन्द
(जय जवान, जय किसान )
ज़ब बच्चा जन्म लेता है| तो माँ की ख़ुशी की कोई सीमा
नहीं रहती है | वह सपने देखने लगती है की बढ़ा हो वो
उसका ध्यान रखेगा|
ज़ब बढ़ा होकर वही लाल ज़ब सेना मे जा मातृ भूमि की
सेवा करने की बात कहता है |तो माँ का हृदय गर्व से भर उठता है |
ख़ुशी ख़ुशी देश की सेवा हेतु अपने पुत्र को भेज देती है |
उस माँ की का दिल कितना सहता .होगा |जो इतना बढ़ा निर्णय लेती है |की अब उसके पुत्र को कभी भी कुछ भी हो सकता है |
फिर भी धैर्य रख वो देश के प्रति अपना कर्तव्य को पूरा करते है |
फिर कुछ दिन बाद पुत्र का विवाह करते है| जानते है| ये सुख क्षणिक या फिर दीर्घ हो सकता है |
माता पिता के बाद उस लड़की का त्याग जो सब जानते हुये उस वीर सैनिक के नाम का सिंदूर लगाती है |माथे पर
इसी तरह दिन बीत रहे होते है |छुट्टी मे घर -परिवार और ड्यूटी मे मातृ भूमि के प्रति कर्तव्य |
अचानक ऐसा होता है| कि सीमा मे जाकर उस सैनिक को अपने देश की रक्षा हेतु अपने प्राणो की आहुति देनी पड़ती है | उस समय उस परिवार की दशा क्या होती होंगी | जिसका एक मात्र पुत्र भी देश की खातिर बलिदान हो गया हो|
उस पिता के सब्र को तो देखिये बुढ़ापे मे जवान बेटे को कंधा देते है| उस माँ का दर्द जिस बहु को शानो सौगत से लाते है |उनको ही विधवा होते देखना बच्चों को देखो जो पिता के साये से महरूम हो जाते है |
सबसे बड़े योद्धा तो उस परिवार का हर सदस्य होते है| जो अपने घर के वीर सैनिक के बलिदान के साथ साथ अपने सपने अरमान दुनिया सब कुछ मातृभूमि की सेवा मे लगे उस वीर के साथ बलिदान कर देते है |
किसी भी सैनिक के बलिदान होने के बाद उसके घर की पारिवारिक दश
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