कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- श्रृंगार
शीर्षक- करके तू श्रृंगार
संपर्क- 7974389033
सिर झुकाकर खड़ी हुई ; नैनों में है नीर।
सिर पर ओढ़े ओढ़नी; सदा हृदय पीर।1।
कर सोलह श्रृंगार तू; पहनी साड़ी लाल।
दिख रही हो नूर तू; उमर अठारा साल।2।
गले में मोती हार है ; सुंदर गोरी गाल
कमर पट्टी लगा सदा; चलती हिरणी चाल।3।
हमसफर के साथ में; फेरे लेते सात।
सात जन्मों में बंधके; प्रेम से किया बात।4।
वैभव लक्ष्मी सदा ही; बनकर रहना साख।
कभी ना होना बेबस; बनकर रहना पांख।5।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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