नाम :एच-एस-अरमो "अरमान " ।
जिला: रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: नारी ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
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÷÷।। नारी ।।÷÷
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बेल सी जिंदगी है मेरी--
मैं हूँ एक नारी ,
किसी परिचित की मोहताज नहीं,
माँ के रूप में बनी घर की हूँ धुरी।।
मेरे हैं रूप अनेक--
मैं ही देवी, माँ,पत्नी और बहन,सुता,
पूजा,सम्मान की परिभाषा जो बनता ,
फिर इन्हें मान क्यों नहीं अब मिलता।।
अपने हक की लड़ाई, लड़ना पड़ा--
इतिहास के पन्नों में वीरांगना है जुड़ा,
फिर भी समाज में स्थान है अधूरा,
ज्ञान से अपने सपनों को करें पूरा।।
घर-परिवार,कुल की शान है नारी--
भ्रूण हत्या कर बनते तुम अपराधी,
बेटी ही दो परिवारों की हितकारी,
बेटी काबिल हो तो महके फुलवारी।।
देश का मान बढ़ाती है नारी--
लिंग-भेद को मिटाने है अब बारी,
कौशल,ज्ञान से,जताती हक़दारी,
समानता रखें,यही है समझदारी ।।
नारी रहेगीं, तभी सृष्टि बढ़ेंगी--
सर्व-समाज को बतानी होगीं,
गंगा सी पवित्रता हमें लानी होंगी,
तभी नारी नया इतिहास रचेगी ।।
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