लेखिका -उर्मिला सिदार
जिला -रायगढ़
राज्य -छत्तीसगढ़
विधा -गद्य
शीर्षक -धरती
संपर्क -930 32 98 994
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धरती अर्थात पृथ्वी ब्रह्मांड का सौर परिवार का एक ग्रह है। जो अपने अक्ष पर निरंतर घूर्णन करती हुई अपने निश्चित आचरण को प्रगटन करती है। पृथ्वी की घूर्णन गति से दिन-रात होता है तथा पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है उसे परिक्रमण गति कहते हैं। परिक्रमण गति के कारण धरती में ऋतुएं बनती है। धरती अर्थात पृथ्वी के उपग्रह चंद्रमा है,ऊ जो पृथ्वी की परिक्रमा करती है। चंद्रमा भी सूर्य से प्रकाशित है, लेकिन इसकी उष्मा शीतल होती है ।धरती में 4 मंडल एवं अंतरिक्ष में सौरमंडल मिलाकर कुल ब्रह्मांड में 5 मंडल पाया जाता है। पहला स्थलमंडल दूसरा जलमंडल तीसरा वायुमंडल चौथा सौरमंडल इन चारों अवस्थाओं की भौतिक रासायनिक क्रियाओं से पांचवा जैवमंडल की उत्पत्ति हुई है। इस तरह से ब्रह्मांड में कुल 5 मंडल पाए जाते हैं। धरती में चार अवस्थाएं पाई जाती है ।पहला पदार्थ अवस्था दूसरा प्राण अवस्था (पेड़ पौधा )तीसरा जीव अवस्था (जीव जंतु पशु पक्षी) चौथा ज्ञान अवस्था मानव, मानव में ही ज्ञान प्रकट करने की समझ होती है। सभी अवस्थाओं में पाई जाने वाली इकाइयां धरती में निवासरत है और सभी एक दूसरे के पोषण के अर्थ में उपयोगी है ।धरती समस्त पदार्थों ,पेड़ पौधों ,जीव जंतुओं और मानव का रहने का स्थली है । धरती के बिना किसी का अस्तित्व की कोई पहचान न प्रगटन नहीं है। धरती ,निवासरत सभी इकाइयों के लिए महत्वपूर्ण है।धरती में सभी की पोषण व्यवस्था है ।इसलिए धरती को धरती माता कहते हैं। माता एक सम्बध है जो पोषण के अर्थ में ममता भाव से प्रगट होती हैं। इसीलिए धरती को, धरती मांँ कहा जाता है। धरती सभी के लिए उपकारी है, कल्याणकारी है।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
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