कवि :- विनोद कुमार चौहान "जोगी"
जिला :- महासमुन्द
राज्य :- छत्तीसगढ़
विषय :- धान और किसान
शीर्षक :- धरती पुत्र किसान
संपर्क :- 9669360722
श्रम से जोतें खेत को, बोते गेहूं - धान।
अपनी किस्मत खुद लिखे, धरती पुत्र किसान।।
सुबह सवेरे से चले, लौटे जब हो शाम।
देव सरीखे पूजता, वह नित अपने काम।।
मातु धरा कहती उसे, श्रम साधक संतान।
अपनी किस्मत खुद लिखे, धरती पुत्र किसान।।
जग के भोजन के लिए, भले रहे उपवास।
अन्न सहज सबको मिले, करता नित्य प्रयास।।
अपने कर्मों से सखे, लाए शुभ्र विहान।
अपनी किस्मत खुद लिखे, धरती पुत्र किसान।।
उनसे हरियाली यहां, लाते वहीं बहार।
जनमानस को दे रहा, कृषक अनुप उपहार।।
सेवा वसुधा की करे, खुद की मैया मान।
अपनी किस्मत खुद लिखे, धरती पुत्र किसान।।
स्वर्णिम बाली धान की, है जिनकी पहचान।
अपनी किस्मत खुद लिखे, धरती पुत्र किसान।।
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