कवि -- चेतन सिंह
पता -- कसडोल, छत्तीसगढ़
संपर्क -9202507146
विषय - दूरदर्शन
शीर्षक - मैं दूरदर्शन हूं ..
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मैं भारत का दिल हूं ,
मैं भारत का अंतर्मन हूं !
मैं भारत को जीता हूं ,
मैं भारत की धड़कन हूं !
मेरे रगो में लहू भारत का ,
मैं भारत का स्पंदन हूं !
मैं भारत की परछाई हूं ,
मैं भारत का आवरण हूं !
मैं भारत की हंसी हूं ,
मैं भारत का क्रंदन हूं !
मैं कृष्णा , रामायण, महाभारत हूं !
मैं स्वयं में ही एक संपूर्ण भारत हूं !
रंग बिरंगी छटा मेरी ,
गीत - संगीत की रंगोली हूं !
शांति , सुरभि , चंद्रकांता ,
चित्रहार , हमलोग , मोगली हूं !
लोगों से मेरा अब मेलजोल नहीं !
90' की तरह अब मेरा रोल नहीं !
जी-स्टार -कलर -सोनी की भीड़ में ,
मैं अब कचरा - कूड़ा हूं !
अपनी अस्मिता को रोता ,
मैं कमजोर ,असहाय बूढ़ा हूं !
दौड़ती-भागती जिंदगी में,
आज भी निर्मल - चन्दन हूं !
अपनी अंतिम सांसें गिन रहा ,
मैं आपका अपना दूरदर्शन हूं !
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