जिला-कोरबा
राज्य- छत्तीसगढ़
विधा-छंद मुक्त कविता
शीर्षक-दिव्य शक्ति
संपर्क नं. 8103564763
---उस परम शक्ति उस दिव्य शक्ति की शक्ति अविरल, निरंतर, सर्वव्यापी है ।
वह देव शक्ति से भी बढ़कर है,
उसकी महिमा सर्वव्यापी है।
वह पवन से भी तेज होता है ,
उसका पार नहीं कोई पा सकता है ।
जल रूपी उसकी स्थिरता से संसार स्वरूप पाता है।
।।इति।।
-गोमती सिंह
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