रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-अकिंचन
विधा-कविता
जग में पैदा होते हैं आम
जन की ही तरह,
अपने मेहनत से मरुभूमि
पर औरो से जुदा,
लिख जाते हैं कर्मठता की
स्याही से हरितिमा|
साधारण होते हुए भी करते
असाधारण कार्य,
तब भी मेहनत करते हैं जब
अकर्मण्य हैं सोते,
बाधाओं को संबल बनाकर
कर्म के बीज बोते|
कर्म वीरों के लिए उपलब्धियों
के द्वार खुल जाते हैं,
लगन के शिलालेखों पर उनके
नाम लिखे जाते हैं,
ऐसे ही शख्सियत तो दुनिया में
अकिंचन कहलाते हैं|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
Nice
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