Wednesday, June 2, 2021

मोनालिसा बेहरा कृत लघुकथा- परामर्श

रचियता- मोनालिसा बेहरा
सुंदरगढ़, ओडिशा
विषय-परामर्श
विधा-लघुकथा

        सिया और मानसी दोनो बहुत घनिष्ठ सहेलियां थी,होस्टल से लेकर कॉलेज तक दोनों हमेशा परछाई की तरह साथ रहती थीं।सिया चुपचाप रहने वाली तो मानसी सदा सकारात्मक सोच से भरी हुई दूसरों के जीवन मे रोशनी लाने वाली तथा मोटिवेट करने वाली थी।
       सिया को बड़े सपने दिखाना और आगे बढ़ना अपने मन की बात कहने की हिम्मत देने का काम मानसी करती थी।दोनो ही पढ़ने में अव्वल थी तथा दोनों का भविष्य भी उज्ज्वल था। मानसी हमेशा कहती कि आगे बढ़ना है मगर पीछे कुछ छूट भी नही जाना चाहिए।
          दोनो का कॉलेज खत्म हुए 10 साल गुजर चुका है और दोनों अपने अपने रास्तो में आगे बढ़ चुके हैं।आज मानसी को शहर के कलेक्टर से मिलने जाना था।वह समय से पहुँचना चाहती थी ताकि उसका काम हो सके। वह आनन फानन में घर से निकलती है और सीधे कलेक्टर के कार्यालय पहुंच जाती है जब उसकी बारी आती है तो वह अभिवादन कर अपनी बात कहने जा ही रही होती है तब देखती है कि शहर की नई कलेक्टर और कोई नही बल्कि उसकी कॉलेज की सहेली सिया है वह उसकी पदवी देख बहुत खुश होती है और उसे बधाई देती है परंतु सिया उसे उन साधारण सूती साड़ी में देख खुश नही होती और कहती है तूम वही मानसी हो जो लोगो को सफल होने के राज बताती थी और तुम खुद अब क्या कर रही हो?
                 सिया को हैरान देख मानसी कहती है कि आज वो सफल है और अपनी परिस्थिति से खुश भी ।मैंने जरूर कोई बड़ा पद हासिल नही किया है पर मैं सैकड़ों अनाथ बच्चों को सहारा देती हूं और उन बच्चों को सही रास्ते पर चलने का परामर्श देती हूं इनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ही मैं जीती हूं।तुम्हे याद है मैंने कहा था कि आगे बढ़ना पर पीछे कोई छूटना नही चाहिए और मैंने किसी को भी छोड़ा नही जो आया उसे साथ लेकर ही आगे बढ़ थी हूं।
               मानसी के चेहरे की संतुष्टि को देखकर सिया भी बहुत खुश हुई और उसने कहा अपने लिए तो सब जीते हैं तुम्हारी ही परामर्श से आज मैने ये पद प्राप्त किया है और आगे भी बहुत लोगों को तुम ऊंचाई तक जरूर पहुँचाओगी।दोनों सहेलियां फिर मुस्कुरा पड़ी।

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