जिला-रायपुर
विषय-तेजस
विधा-कविता
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ये उसकी, आँखों,का समंदर है|
कहती है डूब, मोती मेरे अंदर है|
पूछने लगी एक दिन यूँ ही बस,
लगाव और प्रेम में, क्या अंतर है|
जो था वो लगाव ,जो हो रहा वो प्रेम,
इतनी ही छोटी बात,इतना बड़ा अंतर है|
धुंवे के बीच में, लोभान की खुशबू,
करदे पवित्र मन ,बस यही अंतर है|
ख्यालों में घूमती ,तेरी लफ्जों की जुबां,
मेरे चेहरे में मुस्कान, यही जंतर मंतर है|
खींचती है मुझे, ज्वार की तरह,
तेजस भी तेरा ,खुद जफर सा है|
अमिताभ कुमार दीवान
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