स्थान - मनेंद्रगढ़
जिला - कोरिया
शीर्षक - मां
विधा - कविता
मां से ही है यह सारी सृष्टि
मां से ही है सारा संसार
मां न होती तो जग में
कौन करता परवरिश का कार्य
मां बच्चे की होती है पहली बोली
जिसने जीवन में अमृत घोली
उस मां की वंदना करू
चरण कमलों में शीश धरूं।
अपने संतान की खुशी के लिए
हर कष्ट सहन करती है
अपने आंचल की छाव से
हर विपत्ति को हर लेती है।
जब जब संकट आते है हम पर
मां की दुआएं ही बचाती हैं
खुशकिस्मत होते हैं वो
जिनकी माएं साथ रहती हैं।
उसकी दुवाओं का ही असर है
जो हर बुरी नजर को करता बेअसर है।
वो मां है जिसके रहमोकरम
पर ये गुलेगुल्जार है।
मां की गोद में है अनंत सुखों का भंडार
तेरी ही संतान बनकर मैं जन्म लू बारंबार
ऐसा ही वरदान देना मां अपनी प्यारी बेटी को
तेरे ही नक्शे कदम पर चलू मां अपना जीवन लूं संवार।
ज्योति माला सिन्हा✍
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