Wednesday, May 26, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- दिवास्वप्न

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-दिवा स्वप्न
विधा- कविता (मुक्त छंद)

लाशों का ढ़ेर,धूं-धूं कर जलते
चिताओं पर  शमन होने लगे
मन के अरमानों के ताज|

उन्मुक्त गगन की चाह अब तो
दिवा -स्वप्न से लगने लगे हैं
करोना के तम कहर में|

आओ इन कुहासे में तलाशें हम
शेष बचे अरमानों के जुगनू, 
रेगिस्तान को बाग बनाने| 

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग

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