Friday, April 9, 2021

पुष्पा पटनायक "पुष्प " की रचना- पुष्प की कूक

रचियता- पुष्पा पटनायक "पुष्प "
बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- छन्द मुक्त कविता
शीर्षक -"पुष्प की कूक"
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बसंत बहार है आई 
मादकता है लाई,
आम्र तरूओं ने 
देखो ली है अंगड़ाई ।

रंग- बिरंगे फूलों में 
तितलियां मंडराईं,
पर्यावरण में फिर से 
कादंबरी की कुक सुनाई।

हरित श्रृंगार कर धरा 
सुंदरता को पाई,
प्रसन्नता से सारी प्रकृति 
मंद-मंद मुस्काई।

'पुष्प' बन कादम्बरी 
आज कूक है लगाई,
काव्य संसद परिवार का 
मिलन होगा बड़ा सुखदाई।

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