पेंडरवानी , बालोद , छत्तीसगढ़
विषय - निराकार
निराकार ईश्वर
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निराकार उस ईश्वर का ,
ज्योत जले अंतर्मन में ,
ज्ञान प्रकाश प्रकाशित हो ,
हृदयतल के आंगन में ,
मिलन की चाह बस उसका ही ,
दिन-रैन रहें अब जीवन में ,
तन में आभा बिखर पड़े ,
प्रेम बरसाए जन -जन में ,
रूप उसी का आभास हो ,
जड़ - चेतन और कण -कण में ,
उसके कृपापात्र बनें हम ,
विचलित न हो मन क्षण -क्षण में ,
मनोविकार हो दूर सभी ,
मानवता फैले हर जन में ,
उस अविनाशी में विलीन हो ,
चरम ध्येय हो जीवन में ,
निराकार साकार मिले प्रभु ,
जीते जी इसी तन में ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
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