Monday, March 8, 2021

अमिताभ कुमार दीवान की रचना- निराकार

रचनाकार -अमिताभ कुमार दीवान 
स्थान -रायपुर (छतीसगढ़)
विषय - निराकार 



यादों में एक ,अनबुझी करार बहती है|
रुकती ही नही है, वो बेकरार बहती है|

दुनियाँ के मंजिलों में ,एक झोपड़ी है मेरी,
सपने भी हैं जो,  वो साकार बहती है|

टूटी हुई नदी के ,किनारे का छोटा गांव,
तूफान निगलता है ,तो हर आकार बहती है|

कहती हैं ये हवाएं, टकराती पर्वतों से,
बरसात भी बहती है तो, निराकार बहती हैं|

मेरे बूंदों को नापना छोड़ दो वो कहती है 
बहती है अमित में , वो निराधार बहती है|

अमिताभ कुमार दीवान

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