स्थान -रायपुर (छतीसगढ़)
विषय - निराकार
यादों में एक ,अनबुझी करार बहती है|
रुकती ही नही है, वो बेकरार बहती है|
दुनियाँ के मंजिलों में ,एक झोपड़ी है मेरी,
सपने भी हैं जो, वो साकार बहती है|
टूटी हुई नदी के ,किनारे का छोटा गांव,
तूफान निगलता है ,तो हर आकार बहती है|
कहती हैं ये हवाएं, टकराती पर्वतों से,
बरसात भी बहती है तो, निराकार बहती हैं|
मेरे बूंदों को नापना छोड़ दो वो कहती है
बहती है अमित में , वो निराधार बहती है|
अमिताभ कुमार दीवान
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