Saturday, March 27, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- नींद

रचयिता- मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-नींद
विधा-कविता (मुक्त छंद)

  बचपन में निंदिया 
    रानी को बुलाने
       माँ को लोरी रोज
          लोरी गाना पड़ता है ।

    युवा होने पर निद्रा से
       हर शख्स को हर 
          दिन जबरदस्ती
              जगाना पड़ता है ।

     बुढ़ापा हर दिन ही
         बहुत रुलाती है,
            नींद को  जबरन 
               बुलाना पड़ता है ।

    एक दिन निंदिया रानी
        बिना बुलाये आती है
            बिना लोरी गाये वह
               धरा में सुला जाती है ।

    मीराआर्ची चौहान
   ‌     कांकेर,छग

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