जिला:-कांकेर(छ. ग.)
विधा:-आलेख
विषय:- निराकार
निराकार शब्द का अर्थ होता है जिसका कोई आकार न हो।यह साकार का विलोम शब्द है।जिसका अर्थ होता है आकर युक्त।हमारे जीवन में हमारी ईश्वर के प्रति इतनी श्रद्धा है कि जब निराकार या साकार की बात होती है तो हमें वस्तुएं याद नहीं आती बल्कि ईश्वर याद आते हैं।
हमारे देश में ईश्वर के दो रूपों की उपासना की जाती है।निराकार और साकार।मैं ईश्वर के निराकार रूप को मानती हूँ,मुझे याद नहीं मैं आखिरी बार मंदिर कब गई थी।पर इसका मतलब ये नहीं कि मैं ईश्वर के साकार रूप का आदर नहीं करती।विद्यालय से जुड़ी हुई हूँ तो जब भी विद्यालय में पूजा होती है तो हाथ जोड़कर नमन करती हूँ।मेरे गुरु ने मुझे निराकार ब्रम्ह का ध्यान करना सिखाया है।पर ये नहीं सिखाया की साकार ब्रम्ह का अपमान करो या जो ईश्वर के साकार रूप को मानते हैं उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाओ।
सच्चा भक्त निराकार ब्रम्ह को मान साकार की अवहेलना नहीं करता या साकार ब्रम्ह को मान निराकार की अवहेलना नहीं करता।वो तो बस भक्ति करता है ईश्वर की और जब कोई ऐसी भक्ति करता है तो ईश्वर किसी भी रूप में आकर उसकी मदद करते हैं चाहे वो साकार रूप हो या निराकार।ये मेरे अपने विचार हैं,जो मेरी सोच के दायरे तक सीमित हैं और आपको गलत भी लग सकते हैं।-कु.गरिमा पोयाम
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