Tuesday, March 9, 2021

शिव भोले पर नलिनी बाजपेयी की रचना

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.,)
 विषय-शिव दिनाँक-09.03.21

            *शिव भोले*
बम-बम बोले हे शिव भोले,
सारी दुनियाँ देख तुम्हें डोले।

       जटा-जूट संग बाघम्बर सोहे,
       भाल चन्द्र बीच गंग विराजे।

गले मुंड माला संग भुजंग साजे,
कानन कुंडल ब्याल विकराले।
 
      काल के कपाल अंग भभूत   
     संभाले,
    नन्दी,भृंगी संग भूत पिशाचे।

औघड़ दानी,कैलाशवासी,
दिव्य रूप में  विराजे काशी।

        अर्धनारीश्वर अद्भुत रूप  
   तुम्हारी,
  डमरू पिनाक धारी है त्रिपुरारी।

मृत्युंजय, महाकाल तुम विरागी,
 शशांक,शेखर,अद्भुत अनुरागी।

     शाश्वत अभ्यंकर, त्रिनेत्र धारी,
   रुद्र त्रिपुरान्तकारी, महिमाअपारी।

दूध,घृत,फल,फूल, चढाऊँ,
बेलपत्र,भांग,धतूरा भोग चढाऊँ।

    अनाथन के नाथ,गरल पिए 
भगवान,
  नील कंठ श्मशान शोभावन।

काम,क्रोध,लोभ, छोड़
 बने वीतरागी,
 हे गिरिजापति ,हे नटराजन,
  हे वृषभ सवारी।

    मेरी भव बाधा हरो,त्रिपुंड धारी,
  शत-शत नमन करूँ,नाथ    
 त्रिपुरारी।

बम-बम भोले,है शिव भोले,
सारी दुनियाँ देख तुम्हें डोले।

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