स्थान -----नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला -----जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा---आलेख /कविता /ग़ज़ल
विषय ---संकल्प
शीर्षक ----हम संकल्पित
संकल्प की शक्ति, अपार होती है ।
मझधार में भी नइया ,पार होती है ।
संकल्प लेता मानव, सोच समझकर ।
पूरा कर ही लेता,वह उसको समय पर ।
संकल्प ही मानव को, सही राह दिखाता ।
संकल्प के भरोसे, वह चाह तक जाता ।
संकल्प अगर न हो , कामयाबी असंभव ।
संकल्प से सद कार्यों का, होता है उद्भव ।
सुख दुख का अर्थ, लगता है व्यर्थ ।
सामने दिखाई पड़ता , संकल्प और तर्क ।
संकल्प का इतिहास , है हमारे पास ।
गौतम महावीर राम कृष्ण एक से खास ।
संकल्प के बिना, सफलता हाथ नहीं लगता ।
संकल्प आओ करें, जिससे सपना सजता ।
वर्तमान में है जरुरी, संकल्प शील बनना ।
संकल्प से ही मूर्त रूप में आती कल्पना ।
संकल्प समय की मांग है, ठुकराना किसलिए ।
मानव जीवन सुखमय अपनाइए इसलिए ।
अंधेरा मिटाने के लिए दीप जलाने का संकल्प चाहिए ।
मिट जाएगा पल में अंधेरा,सब संकल्पित हो जाइए ।
संकल्प करने वाला, कोई भी हो सकता है ।
अमीर होगा धनिक होगा गुणवान भी हो ।
ऐसा कोई लक्ष्मण रेखा नहीं बनाया गया ।
हर कोई ले सकता उंगली नहीं उठाया गया ।
न बंधन न शर्त,न धर्म कर्म की दीवार ।
समझ और अच्छाइयों का यह अनुपम उपहार ।
जो चाहे पा सकता है, एक नहीं बार बार ।
हम भी अपने जीवन को इससे करलें श्रृंगार ।
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