Tuesday, March 2, 2021

रजनी शर्मा बस्तरिया की रचना- पलाश

नाम-    श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया
विधा-    मुक्त छंद
जिला-    रायपुर छत्तीसगढ़
शीर्षक-   पलाश तुम रक्तबीजा

पलाश तुम रक्तबीजा


रक्ताभ,रतनार,रक्तिम,
दहकते,  धधकते आग से 
रक्तबीजा पलाश,........
 तुम्हे मैं आज,
बो ही देती ...।
धरती से आकाश में......
कोख में धरती के,
कंदराओं के ओट में।
अंधेरे के प्रकाश में........

जंगलों के पेड़ों पर,
पेड़ों के फूलों पर।
 बीजों के श्वास में........

ताकि तुम दिखते रहो,
मीलों दूर से
इसलिए भी कि,
जंगलों में चुपचाप,
आग भी उगते हैं,
और चूल्हे की जोय भी.....।
खींच कर तुम,
जिजीविषा की परिधि,
खत्म नही हो सकते,
मानुष के भीतर..............।
अस्थि मज्जा के निर्माण मे
रहोगे ही हमेशा हमेशा........।

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