Wednesday, March 31, 2021

मीराआर्ची चौहान की रचना- सरहद

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-सरहदें
विधा-कविता (मुक्त छंद)

  कितना अच्छा जीवन
   उन्मुक्त पंछियों का,
   नये प्रवास में सरहदें 
   वे भी पार कर जाते हैं,
   एक देश से दूसरे  देश
   बे रोक टोक हमेशा|

 कभी भी नहीं बंटती 
 गर्म और ठंडी हवाएं
 नदियाँ और सागर ,
 नीले आसमान भी,
 किसी देश,मजहब ,
 किसी सरहद के लिए|

वीरों की शहादत कभी
छुपी नहीं सरहदों पर,
आखिर कब तक लड़ेंगे
सरहद तले आपस में ,
आपसी वैमनस्य मिटायें,
संकल्प लें सरहद तले|

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग

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