जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-सरहदें
विधा-कविता (मुक्त छंद)
कितना अच्छा जीवन
उन्मुक्त पंछियों का,
नये प्रवास में सरहदें
वे भी पार कर जाते हैं,
एक देश से दूसरे देश
बे रोक टोक हमेशा|
कभी भी नहीं बंटती
गर्म और ठंडी हवाएं
नदियाँ और सागर ,
नीले आसमान भी,
किसी देश,मजहब ,
किसी सरहद के लिए|
वीरों की शहादत कभी
छुपी नहीं सरहदों पर,
आखिर कब तक लड़ेंगे
सरहद तले आपस में ,
आपसी वैमनस्य मिटायें,
संकल्प लें सरहद तले|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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