जिला- कोरबा, छ.ग.
विषय-तितीर्षा
विधा-कविता
शीर्षक- तितीर्षा
---- तितीर्षा यहाँ किसे नहीं होती ,
कौन चाहेगा डूब जाना ,
भव सागर ऐसा सागर है ,
इसे हर कोई चाहेगा
पार उतरना ।
बहुत कठिन है न्याय यहाँ का ,
संभव नहीं हर किसी का समझ पाना ।
योगी, महर्षि, तपस्वियों ने ही राज है इसका जाना ।
इस माया की दुनिया में ,
बहुत कठिन है निष्काम कर्म कर जाना ।
भव सागर पार कर जाने को ,
मोहपाश छुड़ाने को ,
परम आवश्यक है तितीर्षा का होना ।
।।इति।।
"गोमती सिंह"
कोरबा, छ.ग.
बहुत सुंदर कविता लिखी है, इस संसार में जीते हुए जो मोह माया के बंधन अलग अपना ब्यक्तित्व बना ले ऐसी महानता ईश्वरीय देन है।यह तितिर्षा असामान्य मनुश्यौ में ही पारी जाती है।
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