जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - जंगल
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - डरो नही जंगल से
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// डरो नही जंगल से //
दुनिया है जंगल की झाड़ी ,
बीहड़ पथ काँटों की बाड़ी ,
नहीं रुकेगी जीवन - गाड़ी ।
दुनिया है जंगल की खाई ,
भारी मुश्किल आवाजाही ,
जीवन तो गुजरेगी भाई ।
दुनिया है पथरीली पहाड़ ,
जहाँ समस्याओं की बाढ़ ,
फिर भी जीवन की दहाड़ ।
दुनिया भले ही जंगल है ,
जंगल मे करना मंगल है ,
जीवन का यह दंगल है ।
जंगल हो या मंगल प्यारे ,
जीना है उद्यम के सहारे ,
क्यों बैठे हो मन को मारे ?
डरो नहीं जंगल से यारों ,
मन के दुर्गुणों को मारो ,
भक्ति से जीवन सुधारो ।
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