रचनाकार-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-""तितीर्षा "" ।
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●●•••••||••तितीर्षा ••||•••••●●
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बमुश्किल तूने मानुष तन पाया--
फिर इस जगत में,बिना कुछ किये,
जीवन लीला ऐसे ही,क्यों गँवाया ।
तितीर्षा की चाह रखने वाले---
करना होगा तुझको,
इस धरा पर करना होगा ,
त्याग तपस्या में लीन हो,
और सत्कर्मों की राह चुन --।
भवसागर पार लगाने की जुगत में--
सांसारिक जीवन में कई रँग,
देखने पड़ते हैं,हर मानव को,
जो समझ लेता,जीवन क्या है,
वही सही मुक्ति का भागीदार होगा ।
मानव जीवन संघर्ष के लिए-
अच्छे-बुरे का आंकलन,
कभी नहीं करता है और पैसे कमाने,
की भूख लिए,गोते लगाते रहते हैं ।
जिंदगी में जिसने सांसारिकता में,
तितीर्षा का सही अर्थ जो समझ लेता,
वही,यहाँ भवसागर का पार लगा,
स्वर्ग-नरक यहीं है,समझ लेते --।
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