जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - खोज
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - मिल जाये कोई मानव
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// मिल जाये कोई मानव //
बरसों से खोजता हूँ ,
दुनिया की भीड़ में ।
मिल जाये कोई मानव ,
मानवता की नीड़ में ।।
जाने कितने चेहरे ,
मेले शहर बाजार में ।
पहचान भी न आते ,
उनके विविध व्यवहार में ।।
मानव का मुखौटा लिए ,
मानो सब घूमते हैं ।
खोजता हूँ असली मानव ,
कहीं नहीं मिलते हैं ।।
सत्य प्रेम करूणा ,
मानव का सच्चा धर्म ।
कौन भला मानव जब ,
दानव जैसे कर्म ।।
खोज अभी चालू है ,
जब तक मानव न मिले ।
मानवता से जो भरपूर ,
मन बुद्धि और हृदय खिले ।।
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