जिला--कोरबा
विषय--समुंदर का किनारा
विधा--कविता
शीर्षक---समुंदर का.किनारा
समुंदर की ऊँची-ऊँची लहरें तट से टकराकर हमें संदेश दिया करते हैं ,
हृदय में उठती भावनाओं को मर्यादित रखना; ये आवाज उठाया करते हैं ।
हृदय भी अश्रु का एक अथाह समुंदर है जहाँ भावनाओं की लहरें हिचकोले खाती हैं ,
काश ! नामक पलकों की तटों से टकराकर हृदय में समाहित हो जाती हैं ।
तटों से टकराने का दर्द.दिल जाने या.सागर जाने ,
मर्यादित रहने की कीमत ये दोनों ही जानें ।
बड़ी पुरानी बात है -कुछ खोने से ही कुछ मिलते हैं
तभी तो हर मानव के दिल में समुंदर समाऐ रहते हैं ।
जो पलकों की तटों से टकराकर अंत:पुर में समाहित रहते हैं ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा छत्तीसगढ़
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