जिला--कोरबा
विषय--राब्ता
विधा--कविता
शीर्षक--राब्ता
-------कैसे बयां करुं हे ईश्वर !
तुमसे है मुझसे राब्ता ।
अंजान डगर.पे भटक रहा जीव
कुछ तो बता मुझे रास्ता ।
कैसे बयां.............मुझसे राब्ता।
कर्तब्य कर्म से कदम न डिगे
ऐसे मुझे तू राह बता ।
कैसे बयां करुं .......मुझसे राब्ता।
मेरे मनोभाव के दोष मिटा.दे ,
तुमसे रहे मेरा वास्ता ,
कैसे बयां..........मुझसे राब्ता ।
युगों युगों से भटक रहा.जीव
कुछ तो.इसका अंत बता
कैसे बयां.........मुझसे राब्ता ।
बीज पड़े न इस जीवन का ,
मोक्ष के दर का मार्ग बता ।
कैसे बयां........ मुझसे राब्ता ।
तेरी भक्ति का अनुदान मिले ,
कुछ तो ऐसा मंत्र बता ।
कैसे बयां करुं हे ईश्वर
तुमसे है मुझसे राब्ता ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छत्तीसगढ़
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