Tuesday, December 1, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- शिक्षक

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान- दुर्ग (छ.ग)
विधा- मुक्त
शीर्षक - शिक्षक


शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध
होता है ज्ञान देने, ज्ञान लेने का,
    गुरु कौन ,शिष्य कौन, ये           
    समय-समय की बात ।

जीवन के हर मोड़ पर
 मिलते कई शिक्षक,
    ज्ञान लेना है अगर
    कौन छोटा, कौन बड़ा ।

जीवन की शुरुआत,जिनकी ममतामयी गोदी में,
हमारी प्रथम गुरु माँ ही होती ।

अनुभव से ज्ञान बढ़े,लगन से कर्म सधे,
   सीखने की ललक में,
   कितने अज्ञानी ज्ञानी बने ।

किताब से बड़ा कोई 
 शिक्षक नहीं,
 अध्ययन से ही ज्ञान बढ़े ।

एकलव्य ने धनुर्विद्या का अभ्यास किया,
   द्रोणाचार्य को गुरु जैसा      
   मान दिया ।

गुरु का स्थान है, सबसे ऊँचा,
अँगूठा देकर जग को यह    ज्ञान दिया ।

शिक्षा का दान सबसे बड़ा,
जितना देंगे बढ़ता ही जायेगा,
विस्तृत हो हर दिशा मे,ज्ञान प्रकाश फैलायेगा ।।

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