स्थान- दुर्ग (छ.ग)
विधा- मुक्त
शीर्षक - शिक्षक
शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध
होता है ज्ञान देने, ज्ञान लेने का,
गुरु कौन ,शिष्य कौन, ये
समय-समय की बात ।
जीवन के हर मोड़ पर
मिलते कई शिक्षक,
ज्ञान लेना है अगर
कौन छोटा, कौन बड़ा ।
जीवन की शुरुआत,जिनकी ममतामयी गोदी में,
हमारी प्रथम गुरु माँ ही होती ।
अनुभव से ज्ञान बढ़े,लगन से कर्म सधे,
सीखने की ललक में,
कितने अज्ञानी ज्ञानी बने ।
किताब से बड़ा कोई
शिक्षक नहीं,
अध्ययन से ही ज्ञान बढ़े ।
एकलव्य ने धनुर्विद्या का अभ्यास किया,
द्रोणाचार्य को गुरु जैसा
मान दिया ।
गुरु का स्थान है, सबसे ऊँचा,
अँगूठा देकर जग को यह ज्ञान दिया ।
शिक्षा का दान सबसे बड़ा,
जितना देंगे बढ़ता ही जायेगा,
विस्तृत हो हर दिशा मे,ज्ञान प्रकाश फैलायेगा ।।
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