Monday, November 16, 2020

सुन्दरगढ़ से मोनालिसा बेहरा कृत आलेख- मेरे भाई

रचियता-मोनालिसा बेहरा
सुंदरगढ़, ओडिशा
विधा-गद्य
विषय-भाईदूज
शीर्षक-मेरे भाई
             दो भाइयों की इकलौती बहन हूं इसलिए बचपन से ही सब बहुत प्यार करते हैं पर अपने बड़े भाई के साथ जो लड़ाइयां हमने लड़ी हैं बचपन में उसका वर्णन माँ आज भी भाभियों के सामने करती रहती है। अब भी कुछ बहसों में हम उलझ जाते हैं और  लड़ पड़ते हैं पर इसका मतलब कतई नही हैं कि प्यार कम है बिना कहे आज भी एक दूसरे के अंतर्मन की बातें समझ लेते हैं।
                            साल 2013 में जब अचानक पापा छोड़कर चले गए तब मेरे आँसु पोछते हुए भैया ने क्या कहा था आज से मै पापा और भाई दोनों हूं और सच मे उन्होंने हर वो जिम्मेदारी पूरी की है जो ज्यादातर पिता बेटियों के लिये करते हैं। जीवन के उतार-चढ़ाव में मेरी ताकत बन खड़े हो जाते हैं ना केवल मेरी बल्कि माँ का भी इस तरह ख्याल रखना,उन्हें आदर देना मुझे बहुत सुकून पहुंचता है और चिंता मुक्त भी।अक्सर हम देखते हैं कि घर मे कुछ भी गलत हो तो बहुओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है जो कि बहुत ही गलत है अगर बेटे घर का ढंग से ख्याल रखते हैं तो बहुएं क्यो नही रखेंगी मै अपने आपको खुशनसीब मानती। हूं जो भगवान ने इतने प्यारे रिश्तों से नवाजा है। अब क्योकि हम दूर रहते हैं तो यह सम्भव नही की हर राखी या भाईदूज हम साथ हों पर एक दूसरे की सलामती की प्रार्थना तो कर ही सकते हैं।
                हाँ  ऐसे दिनों में यादें कुछ ज्यादा गहरी हो जाती हैं अब तो उनकी बेटी मेरे बेटे के साथ भाईदूज मनाती हैं उनके बचपन को देख अपना बचपन जीने का मौका मिल जाता है।समय सदा एक सा नही होता इसलिए जब तक साथ हैं रिश्तों को मजबूती से बांधे रखें।

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