संबलपुर,जिला-कांकेर( छ. ग.)
दिनाँक- 12.11.20
*धनतेरस पर्व*
धनतेरस का पावन
त्यौंहार है आया,
लक्ष्मी, गणेश,कुबेर
को जग ने मनाया।.
समुद्र मंथन अमृत
कलश ले धरा पर,
अवतरित हुए,जगत में
भगवान धन्वंतरि कहलाए।
खुशियाँ मिले अपार,
माँ लक्ष्मी आई द्वार,
सजा हुआ है हर
आँगन और हर द्वार।
दीपों से सजा हुआ और
दमक उठा सारा दरबार,
पुलकित दिखती धरा,
हर्षित है सारा संसार।
धनतेरस में खुशियाँ और
सुख समृद्धि का मिले उपहार,
हर घर,हर द्वार में
फूलता फलता रहे व्यापार।
माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहे,
धन की हो बौछार,
रंग-बिरंगी रंगोली से
सजा हुआ यह त्यौंहार।
मन से मन का दीप जलाएं,
खुशियाँ मिले हजार,
मिलजुल कर दीप जलाएं
माँ लक्ष्मी करेंगी स्वीकार।
*व्याख्या*- प्रस्तुत कविता में धनतेरस पर्व के बारे में बताया गया है।अमृत मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,( छ. ग.)
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