Monday, October 19, 2020

गरियाबंद से भुवेंद्र बघेल "दिलजला" की रचना- स्वदेशी

रचनाकार - भुवेंद्र बघेल "दिलजला"
जिला - गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
विधा - गीत
शीर्षक - स्वदेशी

*स्वदेशी*
-------------------------------------
स्वदेशी अपना कर देश का मान बढाएंगे।
जो कर्ज राष्ट्र का खाए हैं हम उसे चुकाएंगे।।
स्वदेशी अपना कर देश का मान बढ़ाएंगे।
-----------------------------------------
1तन स्वदेशी रंग स्वदेशी मन स्वदेशी बनाएं।
छोड़ विदेशी ताना बाना गीत स्वदेशी गाएं।।
जो भी हमको छेड़े उसको सबक़ सिखाएंगे।
स्वदेशी अपना कर देश का मान बढ़ाएंगे।
-------------------------------------------
2अपने तो अपने हैं अपनों को अपनाओ।
परदेशी सामान छोड़ देशी को अपनाओ।।
ना कोई ब्राण्ड यहाँ अपना ब्राण्ड बनाएंगे।
स्वदेशी अपना कर देश का मान बढ़ाएंगे ।
-----------------------------------------
3आओ जागें देश जगायें सोये हिंदुस्तान जगायें।
देश के सम्मान में अपना स्वाभिमान जगायें।।
मिलकर आओ देश को आत्मनिर्भर बनाएंगे।
स्वदेशी अपना कर देश का मान बढ़ाएंगे।


No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...