जिला - बलौदा बाजार (छ. ग.)
विषय - शांति / अहिंसा / महात्मा गाँधी
विधा - आलेख सृजन
शीर्षक - शांति औऱ अहिंसा
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// शांति और अहिंसा //
आज विश्व को शांति और अहिंसा की सर्वाधिक आवश्यकता है । सारा विश्व राग , द्वेष , झूठ ,छल , कपट , निंदा , आतंक व मिथ्याभिमान जैसे विविध विकारों से ग्रस्त है । धर्म ,न्याय , मर्यादा , अनुशासन , नैतिकता , शास्त्र , संत - महापुरुष आदि का उपहास किया जा रहा है और अनेक प्रकार के षड़यंत्र द्वारा बदनाम किया जा रहा है । आज मानवजाति दिशाविहीन हो गई है । भौतिक सुख - सुविधाओं में आज का मानव इतना मदमस्त हो गया है कि वह भगवान को भी भूल गया है ।
इस प्रकार नकारात्मक व एक तरफा विकास से मनुष्य का मानसिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया है । स्थिति ऐसी है कि - ' विनाशकाले विपरीत बुद्धि ।' फलस्वरूप चिंता , तनाव , दुःख , बीमारी , उपद्रव एवं पागलपन आदि का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है । चारों ओर अशांति व भय का वातावरण बना हुआ है । मनुष्य अपने को बुद्धिमान व शिक्षित मानता है फिर भी दुःखी व परेशान है । कारण यह है कि आज का समझदार आदमी मरुभूमि के जल से प्यास बुझाना चाहता है । सपने में खीर खाकर तृप्ति का अनुभव करना चाहता है । कैसी मूर्खता है !
अतः शांति और अहिंसा ही वह रामबाण औषधि है जो मानवजाति का तारणहार है । जीवन मे मन की शांति एक बहुत बड़ी उपलब्धि है । शांत मन ही सही निर्णय व सही काम कर सकता है । सागर की गहराई में शांत जल धीर - गंभीर होता है , भले ही सतह पर लहरों की टकराहट चाहे कितनी हो । अर्थात् शांति रूपी पर्दे पर सारी क्रियाएँ व हलचल संचालित होती है ।
इसी प्रकार अहिंसा वह हथियार है जो व्यापक व गहन अर्थ वाला है । मनसा - वाचा -कर्मणा किसी की अहित न करना ही अहिंसा है । केवल प्राण ले लेना ही नहीं अपितु यह तो अहिंसा की प्रारंभिक परिभाषा है । सनातन धर्म मे सबके कल्याण व हित के साथ - साथ दया , प्रेम , करुणा , सत्य , अस्तेय , अहिंसा , शांति जैसे सद्गुण स्वाभाविक विद्यमान हैं । जैन और बौद्ध धर्म मे तो अहिंसा ही सर्वोपरि है ।
महात्मा गाँधी , महावीर स्वामी , गौतम बुद्ध , संत कबीर आदि महापुरुष शांति व अहिंसा के उपासक रहे हैं । सदियों से हमारा भारतवर्ष शांति व अहिंसा का पुजारी है और इसी कारण विश्वगुरु कहलाता है ।
'' शांति और अहिंसा दोनों ,
भारत का पर्याय है ।
विश्वमानव मंगल का ,
यही एक उपाय है ।।
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