पेंडरवानी , बालोद , छत्तीसगढ़
शीर्षक - छत्तीसगढ़ व गांधी जी के विचार
छत्तीसगढ़ व गांधी जी के विचार
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सत्य अहिंसा का मार्ग किसी भी व्यक्ति को महान बना सकता है। इसी मार्ग पर चलकर मोहन दास गांधी , महात्मा गांधी हो गए।उन्होंने खून खराबा, हिंसा के अनैतिक मार्ग पर न चलकर सत्य अहिंसा को सबसे बड़ा धर्म के रूप में स्थापित किये। उनके द्वारा राष्ट्र हित में किये गए अनेक सत्याग्रह आंदोलन आज भी भारतीय समाज का आदर्श है। जव तक सर्व धर्म समभाव व प्राणिमात्र पर दया का भाव इंसानों के हृदय में रहेगा तब तक उनके जैसे महात्मा अपने आदर्शो , उपदेशों व संदेशों के रूप में अमर रहेंगें।
वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ प्रान्त भारत के विभिन्न राज्यों की भांति विकास के पथ पर अग्रणी पंक्ति में अपना नाम अंकित करा रहा है। छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है। हमारा राज्य देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य है , एकमात्र सरप्लस बिजली वाला राज्य, कृषि व वनौषधि में अग्रणी क्रम में है, परंतु धान का कटोरा कहे जाने वाले इस राज्य में नक्सलवाद एक बहुत बड़ी समस्या है। शिक्षा का स्तर सुधर तो रहा है पर बेरोजगारी दिनों दिन बढ़ रहा है। जिसके चलते युवाओं में हिंसात्मक प्रवृत्ति , कम समय में धनवान बनने की लालसा बढ़ी है।दूरस्थ अँचलों में शिक्षा का व्यापक प्रसार/प्रभाव नही हो पाया है तो जीवकोपार्जन भी आम समस्या हो चला है। यहां अंधविश्वास तंत्र -मंत्र का भी जोर है जिसके चलते या कुछ प्रलोभनों के कारण धर्मांतरण अपना पैर पसार रहा है।
आज के इस समय में गांधी जी के आदर्श, उनकी विचारधारा की समाज में महती आवश्यकता है। उनके आदर्श सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलना एक ओर हमें नैतिक बनाता है तो दूसरी ओर हिंसा से दूर करता है। स्वरोजगार लघु व कुटीर उद्योग स्वावलंबी बनने में सहायक है । शिक्षा का जमीनी स्तर पर प्रसार हममें तर्कशीलता व मुद्दों की समझ पैदा करता है। गांधी जी के सादा जीवन उच्च विचार व शाकाहार हमारी दैनिक जीवन मे सरलता व सामाजिकता को बढ़ाता है।
जिस प्रकार मानव शरीर का किसी एक अंग का ठीक न होने पर हम उसे पूर्ण स्वस्थ नही मान सकते उसी प्रकार किसी राज्य या राष्ट्र का एक भी भू भाग विकास से दूर हो तो उसे पूर्ण विकसित नही कहा जा सकता। इस संदर्भ में छत्तीसगढ़ में कई युवाओं का मुख्यधारा को छोड़कर हिंसात्मक प्रवृत्तियों( नक्सलवाद) को अपनाना राष्ट्र में छत्तीसगढ़ को पंगु दिखलाता है। पलायन और फिर वहां बंधक बनाया जाना भी आम समस्या का रूप धारण करते जा रहा है। इसका मुख्य कारण बेरोजगारी ही है जिसे व्यावसायिक शिक्षा द्वारा कम किया जा सकता है।आज के युवकों में पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण करना भी सद्व्यवहार व भारतीय संस्कृति सभ्यता को कमतर दिखाता है। शराब , गांजा व अन्य नशीले पदार्थों को ग्रहण करना आधुनिकता का पर्याय माना जाने लगा है। लड़कियां भी इसमें पीछे नहीं है। फिर कहा जाता है न 'जैसा खाए अन्न वैसा होए मन ' इस कहावत को चरितार्थ करते युवा स्त्री के प्रति अपनी गंदी मानसिकता प्रदर्शित करते हुए आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं।ऐसे अवसर पर गांधी जी की लंदन के माहौल में किये सात्विक व मर्यादित जीवन शैली युवाओ का मार्गदर्शन करता है।
इन सभी उलझनों को दूर करने के लिए शिक्षा , सहकारिता के प्रति युवाओं में जागरूकता को अमलीजामा पहनाया जाना आवश्यक है, शासन - प्रशासन व सामुदायिक स्तर पर योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन आवश्यक है । राम हमारा आदर्श है जो ऊंचे टीले पर चढ़कर भाषण देने के बजाय त्याग , परोपकार, सहभागिता, प्रत्येक व्यक्ति का सर्वागीण विकास के आदर्श को अपने चरित्र से कर दिखाया है। गांधी जी भी उन्हीं आदर्शो को , मानव मूल्यों को अस्पृश्यता निवारण, स्वावलंबन के रूप में चरितार्थ किए और न केवल भारत मे बल्कि पूरे विश्व मे पूजनीय हो गए।
- - शैलेन्द्र चेलक - -
$adhuwad👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद जी
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