Friday, September 4, 2020

बच्चों में रचनात्मक अभिव्यक्ति व सीखने की ललक उत्पन्न करना शिक्षक की सर्वोत्तम कला है : हेमन्त खुटे / Creating creative expression and urge to learn in children is the best art of teacher: Hemant Khute

अपने छात्रों में सृजनात्मक और ज्ञान का आनन्द जगाना एक शिक्षक का महत्वपूर्ण गुण है।आईये जानने का प्रयास करते हैं शिक्षक दिवस के इस अवसर पर महासमुन्द जिले के पिथौरा विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाले ग्राम कसहीबाहरा में परस्त हेमंत खुटे की कहानी:-


पिथौरा  एक शिक्षक का जीवन हमेशा दूसरों के लिए समर्पित होता  है और यही समर्पण भाव उसके दायित्व बोध की एक झलक है । डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कथन  शिक्षक वह नही जो विद्यार्थी के दिमाग में तथ्यों को जबरदस्ती स्थापित करे बल्कि असली शिक्षक वह है जो उन्हें आने वाले कल के लिए तैयार करें। उक्त पंक्ति को अपना  मोटो मानने वाले शिक्षक हेमन्त खुटे पिथौरा  विकासखंड मुख्यालय के ग्राम कसहीबाहरा में  कार्यरत विगत  21 वर्षों से शिक्षा ज्योति को प्रज्ज्वलित कर विद्यार्थियों को भविष्य को गढ़ रहे हैं।
 स्वयं की प्रेरणा ,स्वयं की जागरूकता,स्वयं की इच्छा शक्ति और  स्वयं के परिश्रम से शिक्षा की एक ऐसी बुनियाद रखी जिससे ग्रामीण अंचल  के विद्यार्थियों का जीवन और भविष्य संवर रहा है। अपनी रचनात्मक प्रवत्ति  के कारण इन्होंने महासमुंद जिले में अग्रणी नवाचार शिक्षक के रूप में पहचान बनाई है ।
           1 जुलाई 1999 में शिक्षाकर्मी के रूप में  अपनी शिक्षकीय  जीवन की शुरुआत करने वाले हेमंत वर्तमान में ग्राम कसहीबाहरा  के मिडिल स्कूल में कार्य करते हुए बच्चों में  रचनात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर  बच्चों को एक लक्ष्य की ओर प्रेरित कर रहे हैं ।

बचपन के जिज्ञासु प्रवृत्ति और लगन  से मिली प्रेरणा

शिक्षक ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्रामीण अंचल के बार, बया जैसे छोटी सी  जगहों  से हुई है  लेकिन वैज्ञानिक सोच छात्र जीवन से ही  उत्पन्न होने लगी। यही कारण है कि मैं   हाई स्कूल आते  ही छात्र जीवन से ही  मध्य प्रदेश विज्ञान सभा से जुड़ गया । स्कूलों में विज्ञान सभा के बैनर तले अनेक कार्यक्रम आयोजित करने लगे  ताकि बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित हो सके । वर्तमान में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के  प्रांतीय उपाध्यक्ष पद पर  रहते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन कर लोगों में वैज्ञानिक सोच उत्पन्न कर रहे हैं।  जादू -टोना ,अंधविश्वास जैसे कुरीतियों के विरुद्ध स्कूलों एवं ग्रामीण अंचल में  अंध विश्वास के खिलाफ चमत्कारिक प्रदर्शन अंध विश्वास के खिलाफ जन जागरण अभियान चला रहे हैं ।

मनोरंजक शिक्षा के लिए अभिनव प्रयास

 वर्ष 2014 से अपने विद्यालय में सह संज्ञानात्मक गतिविधियों पर आधारित  मनोरंजक शाला का साप्ताहिक संचालन कर रहे हैं जिसे संडे की पाठशाला के नाम से जाना जाता है । रविवारीय अवकाश का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने संडे की पाठशाला की परिकल्पना  की जिसका मुख्य उद्देश्य गांव के आंगनबाड़ी से लेकर के हाई स्कूल तक  के बच्चों  को विद्यालय से  जोड़ने के साथ-साथ उनके अंदर सृजनात्मक व रचनात्मक प्रवत्ति को बढ़ावा देना था।  इस पाठशाला पर आधारित 6 साल की गतिविधियों पर स्मारिका का प्रकाशन भी किया गया है।संडे की पाठशाला जिले की एक अनोखी पाठशाला है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में शिक्षा सचिव डॉ आलोक शुक्ला के संपादन में निकाली  जा रही मासिक शैक्षिक पत्रिका किलोल के पी डी एफ फ़ाइल में संडे की पाठशाला की रिपोर्टिंग को स्थान दिया गया है।

 शतरंज की पाठशाला 
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स्कूली बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए  साप्ताहिक शतरंज प्रशिक्षण निशुल्क प्रदान करने के लिए शतरंज की पाठशाला का शुभारंभ स्थानीय साहू हॉस्पिटल के सभागार में किया गया है । इस पाठशाला का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों में शतरंज के प्रति अभिरुचि उत्पन्न न कर उनकी  तर्कशक्ति एवं मानसिक मनोबल को मजबूत करना है  । माना गया कि शतरंज खेलने से बच्चों में गणित व विज्ञान जैसे कठिन विषयों पर पकड़ मजबूत होती है ।
शिक्षक खुद शतरंज के राष्ट्रीय खिलाड़ी,राष्ट्रीय निर्णायक,राष्ट्रीय कोच, लेखक, शतरंज पहेली के स्तंभकार व खेल समीक्षक हैं जिसका लाभ  स्कूली बच्चों को मिल रहा है । 'जाने शतरंज को नाम 'से इनके द्वारा अभियान चलाया जा रहा है जिसमें ग्रामीण अंचलों से 3000 से भी ज्यादा बच्चों ने शतरंज का विधिवत प्रशिक्षण लिया है। शिक्षक ने बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देने हेतु अपने निजी मद  50000 रुपये  से अधिक का संसाधन जुटाया है जिसमें 100 नग इंटरनेशनल चेस किट,10 नग चेस क्लॉक व 2 डेमो बोर्ड शामिल है । शिक्षक द्वारा बतौर कार्यकारी संपादक अवैतनिक कार्य करते हुए शतरंज खेल को बढ़ावा देने मासिक खेल पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है। शिक्षक का मानना है कि भविष्य में यह रोचक पाठ्यपुस्तक  की आधार बनेगी ।
हौसले की पाठशाला 

समग्र शिक्षा अभियान के तहत समावेशी शिक्षा के अंतर्गत स्कूल के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए शिक्षक ने हौसले  की पाठशाला के नाम से शिक्षा केंद्र की स्थापना की है जिससे  नगर के आस-पास  से  21 दिव्यांग विद्यार्थियों  ने अपना निशुल्क  पंजीयन कराया है। शनि व रविवार को अपरान्ह 1 से 3 बजे तक साहू अकादमी में संचालित साप्ताहिक निशुल्क अध्यापन कार्य के तहत व्यक्तित्व कौशल के अंतर्गत उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है ।इसके अलावा इनकी रूचि और शारीरिक क्षमता के अनुसार उनके लिए विविध कार्यशाला का आयोजन सामाजिक संस्था के सहयोग से कर रहे हैं । शिक्षक हेमन्त ने बताया दिव्यांग स्कूली  बच्चों के कल्याण के लिए योजना बनाकर  अवकाश के दिनों में उन्हें सहायता पहुंचाई जाती है। दिव्यांग बच्चों के समुचित विकास के लिए यह प्रयास भी  2 वर्षो  से निरंतर जारी है  ।

मुहल्ला पढ़ाई के तहत शिक्षा चौपाल

वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते शिक्षा व्यवस्था प्रभावित है और बच्चे अपने घर और गांव में सिमट कर रह गए हैं । भय और असुरक्षा के माहौल में बच्चों के निजात दिलाने तथा  शासन की मंशा  के अनुरूप  पढ़ई तुंहर दुआर  कार्यक्रम के अंतर्गत आफ लाइन पढ़ाई  को प्राथमिकता देते हुए  शिक्षा  चौपाल की शुरुआत स्वेच्छिक पहल से की गई है । इस पुनीत कार्य हेतु शिक्षक को  अघरिया समाज के सामुदायिक भवन को समाज के लोगों ने अध्यापन कार्य के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया  है। उल्लेखनीय है कि इस शिक्षा चौपाल में गांव के ही सेवानिवृत्त इंजीनियर भगतराम पटेल ,होनहार युवा मेकेनिकल इंजीनियर नीरज दीवान शिक्षादूत बनकर शिक्षा का अलख जगा रहे हैं।

 गीत संगीत के माध्यम से शिक्षा में नवाचार
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 शिक्षक ने पाठ्यपुस्तक आधारित चुनिंदा कविताओं का संयोजन कर 15000 रुपये की लागत से लय व संगीतबद्ध कर बेहतरीन धुनों के साथ रायपुर के रिकार्डिंग स्टूडियो से रिकॉर्ड  कराया है ताकि बच्चों को कविता रटना न पड़े और बिना दिमाग को जोर दिए कविता गीत के रूप में जुबान पर आ जाये।


कहानी उत्सव का आयोजन एवं दीवार पत्रिका का प्रकाशन
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बच्चों में अभिव्यक्ति कौशल विकसित करने प्रत्येक शनिवार को कहानी उत्सव का आयोजन किया जाता है जिसमें बच्चे बारी-बारी से कहानी का वाचन करते है। इसमें एक बच्चे को प्रत्येक सप्ताह  उनके बेहतर प्रदर्शन के आधार पर सर्वश्रेष्ठ कहानी वाचक के रूप में गिफ्ट देकर सम्मानित किया जाता है।यह आयोजन तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी जे आर डहरिया के लिखित अनुमति से विगत 3 वर्षों से जारी है। इसी तरह से बच्चों की कल्पना शक्ति को उड़ान देने पाक्षिक दीवार (भित्ती) पत्रिका  संकल्प का प्रकाशन किया जा रहा है।इस पत्रिका का विमोचन वर्ष 2010 में तत्कालीन बी.आर.सी. श्री डी एन जांगड़े ने किया था।

बच्चों के जन्मदिन का रखा जाता है विशेष ख्याल
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शिक्षक ने बताया कि बच्चों से आंतरिक जुड़ाव बनाने  इस पहल की शुरुआत वर्ष 2014 से की थी जो आज पर्यंत जारी है।  प्रार्थना सभा में बच्चे को विश कर गिफ्ट, शुभकाना पत्र दिया जाता है।शिक्षक ने बताया कि इस शैक्षणिक सत्र से वे बच्चों का जन्मदिन केक काटकर  मनाने का निश्चय किये है। 25 अगस्त को आठवीं कक्षा के छात्र पुरूषोत्तम का शिक्षा चौपाल में केक काटकर इसकी शुरुआत कर चुके है।


पुरस्कार में मिले राशि का उपयोग  स्मार्ट क्लास बनाने में 

शिक्षक ने बताया कि वर्तमान में वे शिक्षा चौपाल में ब्लूटूथ स्पीकर  का प्रयोग कर रहे है तथा दीक्षा एप के माध्यम से क्यू आर कोड का स्कैनिंग कर बच्चों को मनोरंजक ढंग से  अध्यापन कार्य करा रहे है। विद्यालय जब खुलेगा तो डिजिटल क्लास के रूप में तब्दील करेंगे। इस कार्य हेतु शिक्षक ने सम्मान में प्राप्त 28000 की राशि, जन सहयोग से मिले 15000  व निजी मद से 25000 रुपये मिलाकर प्रोजेक्टर,लेपटॉप एवं ब्लूटूथ साउंड सिस्टम  बच्चों के अध्यापन कार्य हेतु क्रय किया है।

 स्वच्छता अभियान के लिए विशेष प्रयास 

स्वच्छता अभियान को लेकर वर्ष 2017 से स्वच्छता एवं ओडीएफ ग्राम बनाने के लिए जन जागरण एवं कार्यशाला का आयोजन किया है।  इनके नेतृत्व में शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल गड़बेड़ा ,शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल  कोलदा एवं  शासकीय मिडिल स्कूल अंसुला में स्वच्छता आधारित कार्यशाला का आयोजन कर स्कूली बच्चों व जनप्रतिनिधियों को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक किया । इस दरमियान लगभग 2000  विद्यार्थियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई।


खेल,कला, शिक्षा ,साहित्य, विज्ञान,फोटोग्राफी व सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान

 शिक्षकीय  कार्य के अलावा विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में अपनी सहभागिता देकर अपने सामाजिक दायित्व बोध का परिचय दिया है ।वर्तमान धारित पदों में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा, छत्तीसगढ़ प्रदेश चेस एसोसिएशन, भारतीय दलित साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ शाखा, नागरिक सुरक्षा सेवा संगठन,राष्ट्रीय कराते गोजीरियूअकादमी भारत,दिव्यांग मित्र मंडल,  प्रगतिशील विश्वकर्मा जन सेवा समिति जैसे विविध संगठनों से जुड़कर अवैतनिक  सेवा प्रदान कर रहे हैं  ।
 शिक्षक द्वारा किये जा रहे  इस उल्लेखनीय कार्य हेतु विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा राज्य, राष्ट्रीय एवं  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशस्ति पत्र प्रदाय कर सम्मानित किया  गया है ।
छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण ज्ञानदीप तथा वर्ष 2017 में  राज्यपाल शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।इनकी व्यक्तिगत प्रतिभा को देखते हुए पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर लेखन कार्य के लिए तत्कालीन पर्यटन एवं शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल , शतरंज के क्षेत्र में 22 सालों से दिए जा रहे योगदान के लिए तत्कालीन संसदीय सचिव रूप कुमारी चौधरी ,विधायक सत्यनारायण शर्मा व खेलमंत्री   भैया लाल राजवाड़े  द्वारा सम्मानित किया गया । साहित्य  के क्षेत्र में लेखन कार्य के लिए राज्य सभा सदस्य भूषण जांगड़े  तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सांसद चंदूलाल साहू ने भी सम्मानित किया है ।

1 comment:

  1. शिक्षक एवं समाज के लिए एक आदर्श हैं ।
    हार्दिक शुभकामनाएं।

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