Monday, September 14, 2020

मोनालिसा बेहरा कृत आलेख- हिन्दी

रचियता-मोनालिसा बेहरा
रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-आलेख
विषय- हिंदी हैं हम

आज 14 सितंबर हिंदी दिवस पर एक ही प्रश्न बार-बार उठ रहा है कि आज भी हम आजादी के इतने साल बाद भी हिंदी को उसका वर्चस्व नही दिला पाए हैं ।भाषायी तौर पर हम आज भी अंग्रेजी की गुलामी ही कर रहे हैं।
                         किसी भी राष्ट्र का गौरव होता है उसका राष्ट्रभाषा परन्तु हिंदुस्तान की अपनी कोई राष्ट्रभाषा है ही नहीं।
और इसके लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं अंग्रेजों के जाने के बाद हम अंग्रेजी के गुलाम हो गए हमारे सरकारी कार्य हम अंग्रेजी में करने लगे।देश मे कई प्रान्त तो पूरी तरह से अपने कार्य अंग्रेजी में करते हैं और अंग्रेजी बोलना अपनी शान समझते हैं।हिंदी बोलने वालों को अनपढ़ समझते हैं।
                        संविधान में 22 भाषाओं को राज भाषा का दर्जा दिया गया है और उसी में एक हमारी हिंदी भी है परंतु हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए क्योंकि देश की 72% जनसंख्या  हिंदी पढ़,बोल और समझ लेती है।ज्यादातर राज्यों में दशवीं तक कि शिक्षा में हिंदी को शामिल किया गया है।भारत मे सबसे ज्यादा हिंदी भाषा का ही प्रयोग होता है।
                         हिंदी को संस्कृत भाषा की बेटी माना जाता है
जो कि सबसे पौराणिक भाषा है।हिंदी परिमार्जित ,संसोधित एवम अपने आपमें पूर्ण है।हम किसी भी भाषा को हिंदी में अनुवाद कर सकते हैं तथा सरल और सहज शब्दो में लिख सकते हैं इसकी लिपि देवनागरी है।हमें हिंदी को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाना ही चाहिए और यह हमारा दायित्व बनता है।हिंदी दिवस एक दिन की भाषा नही है बल्कि हमारी राष्ट्र की पहचान है।

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